कानपुर: जानें कैसे शुरू हुआ विकास दुबे का आपराधिक कैरियर, कैसे बना जिला पंचायत सदस्य?

रिपोर्ट- अरुण गौतम

कानपुर: चौबेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिकरु गांव के एक किसान परिवार में जन्मे विकास दुबे के माफिया बनने की कहानी राजनीति के अपराधिक कार्यों से ही निकलकर बाहर आयी है। विकास दुबे के आपराधिक कैरियर की शुरुआत सन् 1990 से हुई जब विकास ने अपने पिता के अपमान का बदला लेने के लिए अपने गांव से सटे हुए दिब्बा नवादा गांव के चौधरियों को मारा।
जिसमें रिपोर्ट भी दर्ज हुई लेकिन उस वक्त विकास की मदद एक पूर्व विधायक ने की और वो छूट गया। एक तरफ विकास मारपीट करता और दूसरी तरफ़ जब पुलिस उसे पकड़ कर ले जाती तो तुरंत बड़े नेताओं के फोन आने शुरू हो जाते और पुलिस मजबूरन विकास को छोड़ देती। विधायकों, सांसदों और बड़े मंत्रियों का हाथ विकास के सिर को सहारा देने लगे।
जिसके बाद पुलिस भी विकास को हाथ डालने से कतराने लगी। ब्राह्मण बाहुल्य उस क्षेत्र में पिछड़ों की राजनीति हनक कम करने के लिए नेताओं ने विकास का सहारा लेना शुरू कर दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि कई मामलों में विकास या तो पकड़ा ही नहीं जाता था या फिर थाने से ही छोड़ दिया जाता था। विकास दुबे दोबारा तब चर्चा में आया जब वह अपने साथियों के साथ मिलकर सन् 2001 के अक्टूबर माह में शिवली थाना के बाहर भाजपा नेता संतोष शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद जमकर आगजनी व तोड़फोड़ हुई थी।


इसके अलावा उसने कई अन्य हत्या की वारदातों को भी अंजाम दिया था। कुछ मामलों में गिरफ्तारी के बाद उसे जमानत पर छोड़ दिया गया। अपनी हनक और राजनीतिक समर्थन के बलबूते विकास दुबे जिला पंचायत सदस्य चुना गया और तीन गांवों में उसके घर वालों की प्रधानी भी हो गई देखते ही देखते चंद सालों में ही विकास ने अपनी संपर्क सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों तक से बना लिया।

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