महराजगंज: नशे की लत में फंसता जा रहा युवा पीढ़ी, बेखौफ प्रशासन, लोकतंत्र पर खतरा

👤रिपोर्ट- बी.के. द्विवेदी/अमृत जायसवाल

महराजगंज: किसी भी राष्ट्र का विकास उसकी युवा पीढ़ी की सक्रियता पर निर्भर करता है। पर जब राष्ट्र के भावी कर्णधार युवा पीढ़ी पर नशे का जुनून चढ़ जाए तो राष्ट्र का भविष्य किस ओर करवट बदलेगा, यह तो भविष्य तय करेगा। लेकिन यह सच है कि आज का युवा पीढ़ी दिशाहीन होने के नाते नशे की लत में फंसता जा रहा है। मद्यपान तो आम बात है लेकिन इसके साथ ही स्मोकिंग, नशीली दवाओं का सेवन व अन्य माध्यमों के जरिए वह होश खो बैठता नजर आ रहा है। ऐसे में राष्ट्र के विषय में वह क्या सोचेगा समझ में नहीं आता। चाहे जो भी हो यह सच है कि यदि युवा पीढ़ी अपने व राष्ट्र के भविष्य के प्रति जागरूक नहीं हुई तो देश की लोकतंत्र पर खतरा मंडरा सकता है। यदि युवा इसी प्रकार नशे की लत में फंसता जाएगा तो सरकार की कार्यप्रणाली पर देखरेख कम होता जाएगा। सरकार निरंकुशता की ओर अग्रसर होती जाएंगी। उनके अहितकारी फैसले पर उंगली उठाने वाले स्वयं इससे दूर होते जाएंगे। अब सवाल यह उठता है कि युवा पीढ़ी पर नशे की लत आखिर लगता कैसे है।

शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में इजाफा
हम बात करें वर्तमान समय की तो शिक्षा का स्तर तो बढ़ रहा है। लोग शिक्षा की ओर आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन पढ़ने लिखने के बाद युवाओं को नौकरी नहीं मिल पा रही है। जबकि घर गृहस्थी में खर्चा बढ़ता जा रहा हैं। जिसके कारण इसकी भरपाई नहीं कर पा रहे और दिशाहीन होने के नाते वे गम में नशे की लत से हाथ मिला ले रहे हैं और देखते ही देखते उसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं।

संस्कारों में कमी
शिक्षा प्रणाली में प्राय ऐसा देखा जा रहा है कि शिक्षा के दौरान से ही छात्र-छात्राओं में संस्कारों की कमी होती जा रही है। पश्चिमीकरण सभ्यता बड़ी तेजी से पांव पसार रही है। जिसके कारण भारतीय संस्कृति व सभ्यता पिसता नजर आ रहा है। जिसके कारण युवा पीढ़ी छात्र जीवन से ही बड़ों के प्रति आदर भाव, इनकी बात मानना आदि से कतराता जा रहा है। जिसके कारण अनुशासन हीन होता जा रहा है। उनके अंदर से अभिभावकों का डर समाप्त होता जा रहा है और वह इस तरह नशा करने में अपने को अपमानित नहीं मान रहा।


ऐसी ही एक खबर घुघली क्षेत्र से आई है। बताते चलें कि संवाददाता किसी निजी कार्य हेतु घुघली स्थित डीएवी कालेज की तरफ जा रहा था कि वहीं नशे की गिरफ्त में आया एक व्यक्ति सड़क पर गिरा पड़ा था। सोचा जाए तो नशाखोरी का शिकार अधेड़ व्यक्ति किस बात की सीख दे रहा है। बात करीब 8:40 की है संयोग था रविवार का दिन था। छुट्टी होने के नाते छात्र-छात्राओं का आना जाना नहीं था। लेकिन ऐसा नहीं है इस तरह की घटनाएं सिर्फ रविवार को ही होती है। क्या असर पड़ेगा छात्र जीवन पर सोचनीय प्रश्न है। देख कर यदि अनुसरण किये तो छात्र भी फसते जाएंगे। इस तरह विद्या की पवित्र मंदिर पर भी इस तरह की नशाखोरी समाज से परे समझ में नहीं आता। जब शराब की दुकान 10:00 बजे खुलती हैं तो फिर करीब डेढ़ घंटे पहले ही मद्यपान कर सड़क पर गिरा रहना किस बात का द्योतक है। गहराई में जाने पर पता चला इर्द-गिर्द तमाम ऐसी दुकानें हैं जहां ब्लैक में देशी शराब आसानी से मिल जाते हैं। डेढ़ गुनी पैसे देकर सुबह से ही शराबी इसका सेवन करते हैं। एक प्रश्न और सोचना है कि आखिर विभाग किस लिए बना है ऐसे लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता। अवैध रूप से शराब बेचने वाले इस तरह की छूट किसकी पाते हैं। आखिरकार आबकारी विभाग इन्हें दंडित क्यों नहीं करता। कहीं ऐसा तो नहीं कि मामले में उनकी भी मिलीभगत हो।


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