लखनऊ: मानवता हुई तार-तार, बदायूं की घटना ने किया शर्मसार

👤बी.के. द्विवेदी

लखनऊ: गत दिनों उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद में आयु की तीसरे पड़ाव की ओर जा चुकी पचास वर्षीय आंगनवाड़ी सहायिका के साथ हुई हैवानियत एक बार फिर से निर्भया कांड की याद दिला रही है। वहीं दूसरी तरफ यह घटना मानवता को तार-तार करते हुए शर्मसार भी कर रही है।

हालांकि प्रदेश सरकार इस घटना की घोर निंदा करते हुए और सख्त तेवर अपनाते हुए दो की गिरफ्तारी कर चुकी है। जबकि मुख्य आरोपी सत्यनारायण की गिरफ्तारी पर इनाम की राशि बढ़ाकर पचास हजार रुपये कर दी गई है। उसकी तलाश में पुलिस की चार टीमें गठित हुई है। जिसकी जिम्मेदारी प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने एसटीएफ को दी है। एनएसए लगाने का आदेश भी दिया गया है। जो भी हो दोषियों को जितनी भी कड़ी सजा मिल जाए, शिकार हुई महिला से कम ही है। महिला के साथ सत्यनारायण व जसपाल ड्राइवर ने सामूहिक दुष्कर्म कर जिस तरह महिला के प्राइवेट पार्ट में राड डाला, जिससे आंतरिक हिस्सा का फट जाना एक अति भयावह हरकत है। आरोपियों ने इस कदर शैतानी हरकत की उस महिला का एक पैर व पसली भी तोड़ दिया और आखिरकार हैवानियत की शिकार इस महिला का सारा खून बह जाने से असमय काल के गाल में समा गयी। आरोपियों ने इस कदर धृष्टता दिखाइ कि खून से लथपथ सहायिका की लाश को अपनी गाड़ी में बिठा कर उसके घर के सामने फेंक दिया। इतनी बड़े अपराध में पुलिस की लापरवाही को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता।

धार्मिक जगहों पर भी शैतानी की हद।
यही सुनने को मिलता है कि जब मन अशांत हो जाता है, किसी चिंता में व्यथित रहता है या फिर ईश्वर में विश्वास करके लोग धार्मिक जगहों पर जाते और भावना में लीन होकर अपने गम को भुला देते हैं। लेकिन एक धार्मिक जगह पर उसी के कार्यकर्ताओं द्वारा इस तरह का शैतानी हरकत करना, इस पवित्र धार्मिक जगह पर पूजा करने आई महिला के साथ बलात्कार करना, किस बात का द्योतक है समझ में नहीं आता। आखिरकार मानवता इस कदर हैवान क्यों होती जा रही है।

किस ओर करवट बदल रहे हमारे संस्कार?
बदायूं की शर्मसार करने वाली घटना ने हमारे संस्कारों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। समूचे विश्व में संस्कार व सभ्यता में अपनी पहचान बनाने वाले इस देश की मानवता अब किस ओर करवट बदल रही है इसी तरह की घटनाओं से समझा जा सकता है। यह चिंतनीय विषय है, आखिर हमारा संस्कार क्यों गिरता जा रहा है। यदि हमारे संस्कारों में इसी तरह की गिरावट होती रही रो हम अन्य देशों से तुलना नहीं कर सकेंगे। कहीं ना कहीं इस तरह की घटनाओं को अंजाम देना पश्चिमीकरण सभ्यताओं का आगाज दिख रहा है। वैसे अभिभावक ही इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने में नहीं झुकेंगे, अपने बच्चों पर क्या छाप छोड़ पाएंगे, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

जो भी हो उम्र के आखिरी पड़ाव की ओर जा रही महिला के साथ इस तरह की हरकत ने हमारे संस्कारों पर सवालिया निशान कर दिया।


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