गोरखपुर: घाटे में चल रहा उ.प्र. परिवहन निगम, 60 AC बसों के संचालन पर अगले आदेशों तक लगाई गई रोक

गोरखपुर: इस कोरोना महामारी में ट्रेनों की तरह रोडवेज बसों को भी यात्री नहीं मिल रहे हैं। लंबी दूरी तय वाली लगभग सभी बसें घाटे में चल रही हैं। परिवहन निगम की कमाई आधे से भी कम हो गई है। ऐसे में परिवहन निगम ने गोरखपुर और राप्तीनगर डिपो की 60 AC बसों के संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। जिसमें गोरखपुर डिपो की 08 और राप्तीनगर डिपो की 52 AC बसें शामिल हैं।

दरअसल, गोरखपुर से लोकल रूटों जैसे देवरिया, पडरौना, तमकुहीराज, महराजगंज, सोनौली व ठुठीबारी आदि पर तो यात्री मिल जा रहे हैं। लेकिन गोरखपुर से लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और दिल्ली रूट पर यात्री न के बराबर ही आ रहे हैं। इस भीषण गर्मी में भी AC बसें खाली ही चल रही हैं। ऐसे में परिवहन निगम को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है। गोरखपुर परिक्षेत्र में जहां सामान्य दिनों में रोजाना एक करोड़ व उससे अधिक की कमाई हो रही थी, अब लगभग 30 से 35 लाख रुपये पर आकर सिमट गई है। यात्रियों की संख्या के साथ कमाई भी लगातार घट रही है। अधिकतर बसें डिपो परिसर में खड़ी हो गई हैं। संक्रमण के डर से अधिकतर चालक-परिचालक घर चले गए हैं। टैक्स बचाने के लिए निगम प्रशासन ने लंबी दूरी की 54 बसों को परिवहन विभाग में सरेंडर कर दिया है। अभी और बसों को सरेंडर करने की तैयारी चल रही है।

इस बारे में गोरखपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के.के. तिवारी ने बताया कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण की वजह से यात्रियों की संख्या काफी कम हो गई है। AC बसों के लिए मानक के आधार पर यात्री नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में गोरखपुर से संचालित होने वाली AC बसों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। अब स्थिति सामान्य होने पर ही AC बसों को चलाया जाएगा।


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